Cockroach Janta Party Split: कॉकरोच जनता पार्टी के हुए दो टुकड़े, मनीष ब्रह्मभट्ट ने बनाई CJP-Democratic – ये बताई वजह
देश की राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर के प्रस्तावित विशाल छात्र मार्च से ठीक 48 घंटे पहले युवाओं के सबसे चर्चित और व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ में बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। छात्र राजनीति और सोशल मीडिया पर करोड़ों युवाओं को आकर्षित करने वाले इस आंदोलन में दो-फाड़ हो गई है। आंदोलन के प्रमुख संस्थापक सदस्य और युवा एक्टिविस्ट मनीष ब्रह्मभट्ट ने मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह करते हुए एक नए धड़े ‘कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक‘ यानी सीजेपी-डी के गठन का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने संगठन के मुख्य संस्थापक अभिजीत दीपके पर आंदोलन को अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के हाथों बेचने तथा इसे ‘टीम केजरीवाल’ में तब्दील करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। दूसरी तरफ अभिजीत दीपके ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे आंदोलन को कमजोर करने की साजिश बताया है। आइए समझते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी में यह फूट कैसे पड़ी, मनीष ब्रह्मभट्ट कौन हैं और 5 सितंबर के ऐतिहासिक दिल्ली मार्च पर इसका क्या असर पड़ेगा।
Cockroach Janta Party Split – CJP vs CJP-D: छात्र आंदोलन में फूट की पूरी इनसाइड स्टोरी

नीट पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ मई 2026 में शुरू हुए इस व्यंग्यात्मक आंदोलन ने बहुत कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। लेकिन जैसे-जैसे आंदोलन का दायरा बढ़ा, इसके आंतरिक नेतृत्व को लेकर असंतोष के सुर भी तेज होने लगे।
3 सितंबर 2026 को एक प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए मनीष ब्रह्मभट्ट ने घोषणा की कि वे असली जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक’ का गठन कर रहे हैं। उन्होंने देश भर के उन सभी वालंटियर्स, प्रतियोगी छात्रों और युवाओं से सीजेपी-डी से जुड़ने का आह्वान किया है जो किसी भी राजनीतिक दल की कठपुतली बने बिना शुद्ध छात्र हितों के लिए लड़ना चाहते हैं।
कौन है मनीष ब्रह्मभट्ट ?
छात्र राजनीति और समसामयिक आंदोलनों में मनीष ब्रह्मभट्ट एक सक्रिय और मुखर युवा चेहरा माने जाते हैं। वे देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, भर्ती घोटालों और छात्रों के मानसिक तनाव के खिलाफ जमीनी स्तर पर आवाज उठाते रहे हैं।
जब मई 2026 में अदालती टिप्पणी के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन की नींव रखी गई थी, तब मनीष ब्रह्मभट्ट इसके शुरुआती कोर वालंटियर्स में से एक थे। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए पहले छात्र धरने, भूख हड़ताल और देश भर के छात्रों को सोशल मीडिया पर जोड़ने में महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका निभाई थी। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के छात्र समूहों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। मनीष का दावा है कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य छात्रों के हक की लड़ाई को बिना किसी राजनीतिक समझौते के आगे बढ़ाना है।
‘टीम केजरीवाल’ और राजनीतिक सौदेबाजी के गंभीर आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट ने सीजेपी के मुख्य संयोजक अभिजीत दीपके पर बेहद तीखे और दस्तावेजी आरोप लगाए हैं। उनके आरोपों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- आंदोलन का राजनीतिकरण: ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी की कोर कमेटी में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनके संबंध सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं से हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के नाम पर शुरू किए गए इस मंच को चुपचाप ‘टीम केजरीवाल’ का अघोषित विंग बना दिया गया है।
- जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: उनका कहना है कि जिन्होंने धूप और पुलिस की लाठियों के बीच आंदोलन को खड़ा किया, उन्हें फैसले लेने की प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर कर दिया गया और वातानुकूलित कमरों में बैठकर मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं।
- सोशल मीडिया और फंड्स पर एकाधिकार: संगठन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और एकत्रित संसाधनों का इस्तेमाल छात्रों के मूल मुद्दों के बजाय चुनिंदा नेताओं की निजी राजनीतिक छवि चमकाने के लिए किया जा रहा है।
अभिजीत दीपके का पलटवार: ‘हम केवल छात्रों की ए-टीम हैं’
इन सभी गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के मुख्य संस्थापक अभिजीत दीपके ने मनीष ब्रह्मभट्ट के दावों को बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
दीपके ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी न तो किसी पार्टी की बी-टीम है और न ही किसी नेता की समर्थक। उन्होंने कहा कि हमारा संगठन केवल और केवल देश के शोषित छात्रों की ‘ए-टीम’ है। दीपके का आरोप है कि 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होने वाले विशाल मार्च और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आंदोलन को तोड़ने और छात्रों का ध्यान भटकाने के लिए यह सुनियोजित चाल चली गई है। उन्होंने दावा किया कि देश भर के छात्र उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और 5 सितंबर का शांतिपूर्ण मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही निकलेगा।
5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर क्या पड़ेगा असर?
इस आंतरिक कलह और दो-फाड़ के बाद 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाले प्रोटेस्ट मार्च को लेकर आम छात्रों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है:
- छात्रों में वैचारिक विभाजन: विभिन्न राज्यों से दिल्ली पहुंच रहे प्रतियोगी छात्र अब दो खेमों में बंटते नजर आ रहे हैं। एक खेमा जहां अभिजीत दीपके के मूल संगठन के साथ मार्च में शामिल होने पर अड़ा है, वहीं दूसरा खेमा ब्रह्मभट्ट के नेतृत्व वाले सीजेपी-डी के साथ जुड़कर अलग रणनीति बना रहा है।
- दिल्ली पुलिस की सतर्कता: दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात पर नजर रख रही हैं कि दोनों गुटों के बीच किसी प्रकार का टकराव न हो। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
CJP बनाम CJP-Democratic: दोनों गुटों की स्थिति एक नजर में
| तुलनात्मक पैरामीटर | कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) | CJP-Democratic (CJP-D) |
|---|---|---|
| मुख्य नेतृत्व | अभिजीत दीपके (संस्थापक) | मनीष ब्रह्मभट्ट (संयोजक) |
| गठन का समय | मई 2026 | सितंबर 2026 (विभाजन के बाद) |
| मुख्य स्टैंड | पेपर लीक कानून और 1 करोड़ मुआवजा | अराजनीतिक शुद्ध छात्र आंदोलन |
| प्रमुख आरोप | ‘टीम केजरीवाल’ से साठगांठ का आरोप | आंदोलन तोड़ने और साजिश का आरोप |
| 5 सितंबर का रुख | इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च | वालंटियर्स का नया अराजनीतिक कैडर |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: Cockroach Janta Party में विभाजन क्यों हुआ?
जवाब: मनीष ब्रह्मभट्ट ने संगठन पर अलोकतांत्रिक तरीके से काम करने और आम आदमी पार्टी के प्रभाव में आकर ‘टीम केजरीवाल’ बनने का आरोप लगाकर अलग गुट बनाया है।
सवाल 2: कौन है मनीष ब्रह्मभट्ट?
जवाब: मनीष ब्रह्मभट्ट एक सक्रिय छात्र नेता और सीजेपी के शुरुआती कोर वालंटियर हैं, जिन्होंने अब नए गुट CJP-Democratic की नींव रखी है।
सवाल 3: CJP-Democratic (CJP-D) की मुख्य मांग क्या है?
जवाब: सीजेपी-डी का दावा है कि वह छात्रों के आंदोलन को किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त रखकर शुद्ध छात्र हितों के लिए काम करेगी।
सवाल 5: क्या 5 सितंबर का दिल्ली प्रोटेस्ट मार्च रद्द हो गया है?
जवाब: नहीं, विभाजन के बावजूद मुख्य सीजेपी नेतृत्व ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का फैसला बरकरार रखा है।
निष्कर्ष: Cockroach Janta Party का यह विभाजन इस बात का बड़ा उदाहरण है कि जब कोई गैर-राजनीतिक युवा आंदोलन तेजी से लोकप्रिय होता है, तो उसमें राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और विचारधाराओं का टकराव होना लगभग तय हो जाता है। मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा CJP-Democratic का गठन और ‘टीम केजरीवाल’ का आरोप इस बात का संकेत है कि देश के छात्र अब अपने मुद्दों पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक सौदा स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि देश के लाखों युवा और प्रतियोगी छात्र किस गुट को अपनी असली आवाज मानते हैं।
