18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली पहुंचे व्लादिमीर पुतिन, आज पीएम मोदी संग द्विपक्षीय वार्ता; सुखोई-57 और रक्षा सौदों पर टिकीं नजरें
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और प्रतिबंधों के दौर के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शुक्रवार तड़के राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे। पालम हवाई अड्डे पर उनके विशेष विमान के उतरते ही भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनयिकों ने उनका औपचारिक स्वागत किया। सप्ताहांत को प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले औपचारिक सम्मेलन से पूर्व, आज का दिन पूरी तरह भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों के नाम रहेगा। राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आज एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होने जा रही है, जिस पर वाशिंगटन से लेकर मॉस्को और बीजिंग तक पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

फरवरी 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति पुतिन रूस की सीमाओं से बाहर निकलकर किसी अन्य देश में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शरीक हो रहे हैं। इससे पूर्व 2023 में जोहान्सबर्ग सम्मेलन में उन्होंने आईसीसी वारंट के चलते केवल वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया था, जबकि 2024 के कजान सम्मेलन की मेजबानी स्वयं रूस ने की थी। पुतिन की यह भारत यात्रा स्पष्ट दर्शाती है कि मॉस्को के लिए नई दिल्ली की साझेदारी कितनी अहम है और भारत बाहरी दबावों से अप्रभावित रहकर स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन-मोदी द्विपक्षीय वार्ता का गहरा रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात सामान्य कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे है। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को किर्गिज गणराज्य के बिश्केक में एससीओ सम्मेलन के दौरान मिले थे। महज दो सप्ताह के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी व्यक्तिगत मुलाकात गहरे रणनीतिक विश्वास को रेखांकित करती है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के अनुसार, शुक्रवार की वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, विज्ञान और रक्षा क्षेत्र में साझा उत्पादन मुख्य एजेंडा रहेगा।
रूस के लिए यह यात्रा पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच यह संदेश देने का अवसर है कि भारत जैसा मजबूत साझेदार आज भी उसके साथ खड़ा है। वहीं भारत के लिए यह बैठक सीमा सुरक्षा, आधुनिक सैन्य कलपुर्जों की निरंतर आपूर्ति और ऊर्जा हितों को सुदृढ़ करने के लिहाज से अत्यंत आवश्यक है।
सुखोई सु-57 स्टील्थ फाइटर जेट: भारतीय वायुसेना के लिए बड़ा अवसर
आज की वार्ता का सबसे प्रमुख विषय पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई सु-57 (Sukhoi Su-57) की संभावित पेशकश है। भारतीय वायुसेना अपनी घटती स्क्वाड्रन संख्या और सीमाओं पर चीन के पांचवीं पीढ़ी के जे-20 विमानों की तैनाती के मद्देनजर आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता महसूस कर रही है।
रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि सुखोई-57 की संभावित बिक्री और संयुक्त उत्पादन पर चर्चा एजेंडे में शामिल है। रूस इस विमान के युद्ध-परीक्षित मॉडल को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्थानीय विनिर्माण और तकनीक हस्तांतरण के साथ पेश करने का इच्छुक है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है, तो यह भारतीय उपमहाद्वीप में वायुसेना के सामरिक संतुलन को भारत के पक्ष में काफी मजबूत कर देगा।
मेक इन इंडिया के तहत नागरिक यात्री विमानों का निर्माण
नागरिक उड्डयन क्षेत्र में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक साझेदारी की तैयारी है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता एविएशन बाजार है, जहां पश्चिमी विमान निर्माताओं से नए यात्री विमानों की आपूर्ति में लंबा विलंब हो रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए दोनों देश घरेलू स्तर पर यात्री विमान निर्माण पर आगे बढ़ रहे हैं।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने पुष्टि की है कि देश में विमान उत्पादन को लेकर रूस से बातचीत तेज हो गई है। इसके अंतर्गत इल्युशिन आईएल-114 (IL-114) टर्बोप्रॉप और सुखोई सुपरजेट 100 जैसे विमानों का भारत में विनिर्माण प्रस्तावित है। आईएल-114 टर्बोप्रॉप विमान क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के लिए मुफीद माना जा रहा है, जिससे भारत में नागरिक विमान निर्माण का नया आधार तैयार होगा।
दुर्लभ खनिज, ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्र भुगतान व्यवस्था
प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा है। आज की बैठक में ऊर्जा प्रवाह की निरंतरता और रुपया-रूबल व्यापार को सुगम बनाने पर चर्चा होगी।
इसके अलावा ‘दुर्लभ पृथ्वी खनिजों’ (Rare Earth Minerals) का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेमीकंडक्टर, चिप्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक हथियारों के लिए ये खनिज अनिवार्य हैं, जिन पर वर्तमान में चीन का 70 प्रतिशत वैश्विक नियंत्रण है। रूस के पास इनके विशाल भंडार हैं और दोनों देश संयुक्त अन्वेषण व दीर्घकालिक आपूर्ति पर सहमति बना सकते हैं। साथ ही, ब्रिक्स की स्वतंत्र वित्तीय भुगतान प्रणाली (BRICS Pay) पर भी विमर्श होगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत-रूस द्विपक्षीय एजेंडा
| मुख्य विषय | रणनीतिक विवरण एवं तथ्य |
|---|---|
| सम्मेलन स्थल | 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, भारत मंडपम, नई दिल्ली |
| प्रमुख द्विपक्षीय बैठक | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (शुक्रवार) |
| रक्षा एजेंडा | पांचवीं पीढ़ी के सुखोई सु-57 स्टील्थ फाइटर की संभावित डील व स्पेयर पार्ट्स |
| नागरिक उड्डयन परियोजना | इल्युशिन IL-114 और सुखोई सुपरजेट 100 का मेक इन इंडिया में उत्पादन |
| ऊर्जा एवं कच्चा तेल | रियायती दरों पर रूसी क्रूड ऑयल की आपूर्ति व रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली |
| खनिज एवं तकनीक | चिप और ईवी उद्योग के लिए दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earths) की साझेदारी |
| ऐतिहासिक संदर्भ | फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला विदेशी ब्रिक्स इन-पर्सन दौरा |
| वैश्विक हस्तियां | शी जिनपिंग (चीन), मसूद पेजेशकियन (ईरान), एंटोनियो गुटेरेस (संयुक्त राष्ट्र) |
भारत मंडपम में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा और कूटनीतिक संतुलन
सप्ताहांत को आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक है। विस्तारित ब्रिक्स के तहत सदस्य देश पहली बार इतने बड़े स्तर पर दिल्ली में एकत्र हो रहे हैं:
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की धरती पर आ रहे हैं। लद्दाख गतिरोध के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिरता और व्यापार को सामान्य बनाने के लिहाज से काफी अहम है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 2024 में पद संभालने के बाद पहली बार भारत पहुंचे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच उनकी उपस्थिति चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मायने रखती है। इसके अलावा मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी सम्मेलन में शामिल हैं। ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मौरो विएरा कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस और डब्ल्यूटीओ प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला भी दिल्ली पहुंचे हैं।
बहुध्रुवीय विश्व में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति
नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन साबित करता है कि विश्व व्यवस्था अब बहुध्रुवीय हो चुकी है। भारत ने अपनी विदेश नीति को बड़ी कुशलता से संतुलित किया है।
एक तरफ भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘क्वाड’ में हिंद-प्रशांत की सुरक्षा पर सक्रिय है, तो दूसरी तरफ ब्रिक्स और एससीओ में रूस, ईरान और चीन के साथ बैठकर विकासशील देशों के हितों की बात करता है। यह संतुलन भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहां भारत किसी गुट का पिछलग्गू बनने के बजाय एक स्वतंत्र कूटनीतिक धुरी बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
जवाब: राष्ट्रपति पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए हैं, जिसमें रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर मुख्य जोर है।
सवाल 2: पुतिन के इस दौरे को ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?
जवाब: फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति पुतिन रूस से बाहर किसी अन्य देश में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से भाग ले रहे हैं।
सवाल 3: मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
जवाब: वार्ता में पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई सु-57 की संभावित आपूर्ति, भारतीय वायुसेना के लिए कलपुर्जों की निरंतरता और ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना के विस्तार पर चर्चा शामिल है।
सवाल 4: नागरिक उड्डयन क्षेत्र में दोनों देश क्या नया कदम उठा रहे हैं?
जवाब: दोनों देश क्षेत्रीय यात्री विमानों जैसे इल्युशिन IL-114 टर्बोप्रॉप और सुखोई सुपरजेट 100 के भारत में विनिर्माण पर काम कर रहे हैं, जिससे घरेलू विमानन उद्योग को मजबूती मिलेगी।
सवाल 5: ब्रिक्स सम्मेलन में अन्य प्रमुख विदेशी नेता कौन शामिल हैं?
जवाब: सम्मेलन में सात वर्ष बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी और यूएन प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस शामिल हैं।
